राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान

रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

योजनाएं

नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एवं टेक्नोलॉजी (NMAET)

कृषि विभाग की कई योजनाओं को मिलाकर नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एवं टेक्नोलॉजी (NMAET) का प्रसार उप मिशन सृजित किया गया है। ताकि प्रसार कर्मियों का प्रभावी क्षमता विकास किया जा सके। इस क्षमता हेतु राष्ट्र-स्तरीय/अन्तर्राजीय एवं राज्य के अन्तर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम समेती द्वारा विकसित किये गये हैं, जिसके अन्तर्गत प्रसार कार्मिकों (एन0जी0ओ0, पैरा एक्सटेंशन वर्कर्स, इन्टरप्रीन्यूर्स, एग्री-क्लीनिक, एग्री-विजनेस सेन्टर, निवेश आपूर्तिकर्ता आदि समेत) के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का समन्वय, प्रबन्ध कम्यूनीकेशन तथा पार्टीसिपेटरी पद्धति पर माड्यूल्स का विकास, परियोजना नियोजन, मूल्यांकन तथा क्रियान्वयन हेतु परामर्शी सेवा का कार्य किया जा रहा है।

योजना आयोग, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कृषि प्रसार सुदृढीकरण हेतु वर्ष 2013-14 तक आत्मा मॉडल का क्रियान्वयन किया जा रहा था। वर्ष 2014-15 से आत्मा योजना को नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एण्ड टेक्नालॉजी (NMAET) में संविलीन कर दिया गया है। सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (SMAE) कृषि प्रसार के लिए NMAET का एक उपमिशन है जो कृषकों में जागरूकता पैदा करने तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकी के कृषि एवं एलाइड सेक्टर में अधिकाधिक उपयोग पर केंद्रित होगा

इसके मुख्य अवयव निम्नवत हैं:

  • कृषक प्रशिक्षण, एक्सपोजर विजिट, किसान मेला, किसान गोष्ठी, कृषक वैज्ञानिक संवाद, प्रदर्शनों का आयोजन, कृषक समूहों का कैपेसिटी बिल्डिग, फार्म स्कूल का आयोजन।
  • जागरूकता पैदा करने तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकी के कृषि एवं एलाइड सेक्टर में अधिकाधिक उपयोग।
  • तकनीकी प्रसार हेतु नये टूल्स यथा- पीको प्रोजेक्टर्स, कम कीमत की फिल्मो हैंड-हेल्ड-डिवाइस, मोबाइल आधारित सेवा, किसान काल सेन्टर आदि का प्रयोग।
  • विभिन्न प्रोग्राम यथा स्कीमों के प्रसार संबन्धी प्रयासों का जनपद स्तर पर पर "कृषि तकनीक प्रबन्ध अभिकरण" एवं विकास खण्ड स्तर पर ब्लाक टेक्नॉलाजी टीम तथा ब्लाक फॉर्म एडवाइजरी कमेटी द्वारा समन्वय।

देशी योजना (Diploma in Agriculture Extension Services for Input Delars)

भारत सरकार ने कृषि में खाद्यान उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने तथा कृषकों की आय बढ़ाने हेतु उत्पादन में लक्ष्य के अनुरूप कृषि निवेश की मात्रात्मक एवं गुणवत्ता युक्त निवेश उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जो इनपुट्स डीलर्स कृषकों के सम्पर्क में है तथा कृषि निवेश उपलब्ध करा रहे है उनमें कृषि शिक्षा का औपचारिक ज्ञान नहीं होने के फलस्वरूप गम्भीर दिक्कतें आ रहीं हैं। उ०प्र० में लगभग 45000 इनपुट डीलर्स होल सेलर्स एवं फुटकर विक्रेता बीज उर्वरक एवं कीटनाशी रसायनों का वितरण/विक्रय विभागीय लाइसेन्स प्राप्त कर कृषकों को कर रहे है। इनकी संख्या को देखते हुए इन इनपुट डीलर्स के ज्ञानवर्धन हेतु राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं प्रबन्ध संस्थान (मैनेजमेंट) हैदराबाद द्वारा एकवर्षीय 48 सप्ताह का डिप्लोमा कोर्स की संरचना का प्रारूप तैयार किया है जिसमें शिक्षित नवयुवकों को कृषि तकनीकी ज्ञान उपलब्ध करा कर उन्हें डिप्लोमा का प्रमाण पत्र उपलब्ध करा कर प्रसार कार्यकर्ता (गैर सरकारी) के रूप में भी क्षेत्रीय समस्या के समाधान हेतु एक संगठनात्मक ढ़ांचा तैयार करने की व्यवस्था है।

उद्देश्य :-

  • इनपुट डीलर्स को क्षेत्रीय आधार पर उत्पादन समस्या के समाधान का ज्ञान देकर तथा फसल उत्पादन तकनीक का ज्ञान वर्धन कर कृषि निवेश के प्रभावी क्षमता का विकास करना।
  • कृषि निवेश से सम्बन्धित सरकारी नियमों एवं कानूनी व्यवस्था की जानकारी देना।
  • ग्राम स्तर का कृषि निवेश कर्ता का उपयोग कर कृषक सम्बन्धी प्रभावी सूचना प्राप्त करना।

गाइड लाइन्स :-

  • यह योजना मैनेज हैदराबाद द्वारा समेती के माध्यम से विभागीय अधिकारियो के सहयोग से संचालित की जा रही है इसमें 40 सप्ताह की क्लासरूम वार्ता तथा 08 क्षेत्रीय प्रक्षेत्र विजिट साप्ताहिक बन्दी के दिन जिले स्तर पर आयोजित करने की व्यवस्था है।

प्रशिक्षण की वित्तीय व्यवस्थाः-

प्रशिक्षण पर कुल रू 20000.00 की व्यय की व्यवस्था का प्राविधान मैनेजमेंट द्वारा निर्धारित किया गया है। जिसमें निम्नवत् प्राविधान है।

  • 100% स्वयं के व्यय अंशदान पर।
  • भारत सरकार द्वारा रू० 10000.00 प्रति इनपुट डीलर्स प्रशिक्षार्थी मैनेजमेंट हैदराबाद के माध्यम से दिया जा रहा है तथा रू० 10000.00 अवशेष इनपुट डीलर्स से प्राप्त करने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत रू० 5000.00 तक कृषि निवेश कम्पनियों से भी प्राप्त किया जा सकता है।
  • राज्य इस धनराशि की व्यवस्था आर०के०वी०वाई० (RKVY) योजना से भी कर सकता है।

उ०प्र० में देशी योजना की प्रगति :-

  • मैनेजमेंट द्वारा देशी योजना का संचालन समेती के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2015-16 से किया जा रहा है वित्तीय वर्ष 2015-16 में पॉच जनपदों की स्वीकृति 50% अनुदान के अंतर्गत मैनेजमेंट द्वारा प्रदान की गई थी। जिसमें क्रमशः गाजीपुर, गोरखपुर, कानपुर, बरेली एवं आगरा जनपदों का चयन कर 40-40 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण हो चुका है।
  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के अंतर्गत चार जनपदों की स्वीकृति 50% अनुदान के तहत प्राप्त हुई थी जिसमें वाराणसी, लखीमपुर खीरी, अलीगढ़ एवं मुजफ्फरनगर का चयन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम जनपद स्तर पर ही संचालित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण हो चुका है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 में 50% अंशदान पर 12 जनपदों में तथा 07 जनपदों में 100% स्वयं के अंषदान पर यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

राज्य औषधीय पादप परिषद रहमानखेड़ा, लखनऊ

राज्य औषधीय पादप परिषद, रहमानखेड़ा, लखनऊ राष्ट्रीय औषधीय पादप परिषद आयुष मंत्रालय नई दिल्ली के अधीन कार्यरत है। यह संस्था औषधीय पौधों के उपयोग संरक्षण एवं खेती को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है। प्रदेष के ऐसे कृषक जो औषधीय पौधों की खेती से जुड़े हैं, के क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी संस्था द्वारा किया जाता है।