राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान

रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

दिशा निर्देश

    1. यदि परीक्षण के दौरान मशीन की असेम्बली का कोई भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है तो परीक्षण प्राधिकारी द्वारा निर्धारित समयावधि में आवेदनकर्ता को निःशुल्क इसे बदलना होगा।
    2. यदि परीक्षण हेतु किसी पार्ट की आवश्यकता परीक्षण प्राधिकारी को होती है तो इसकी व्यवस्था आवेदनकर्ता को निःशुल्क करनी होगी।
    3. यदि परीक्षण प्राधिकारी द्वारा कोई सेवा प्रदान की जाती है तो इसका भुगतान आवेदनकर्ता को करना होगा।

  1. फाउन्डेशन तैयार करने एवं स्थिरता हेतु व्यय, जो सामान्यतः संस्थान में उपलब्ध नही होते हैं और जो परीक्षण के अन्तर्गत मशीन के कार्य करने हेतु आवश्यक हैं और अन्य सभी स्टोर सामग्री पर होने वाला व्यय आवेदनकर्ता द्वारा वहन किया जायेगा।.
  2. परीक्षण प्रतिवेदन निर्गत होने के उपरान्त ही परीक्षण प्राधिकारी के विवेकानुसार मशीन के परीक्षण के दौरान टूट-फूट अथवा नष्ट हुए एसेम्बली और भाग को आवेदनकर्ता को वापस किया जायेगा।
  3. आवेदनकर्ता परीक्षण प्राधिकारी से प्राप्त सूचना के एक माह के अन्दर मशीन प्राप्त करने के लिये स्वयं व्यवस्था करेगा यदि आवेदनकर्ता इस अवधि में मशीन उठाने में असमर्थ रहता है तो परीक्षण प्राधिकारी द्वारा निर्धारित दर से भुगतान करना होगा, किन्तु यह अवधि चार माह से अधिक नही होगी। तीन माह की अवधि समाप्त हो जाने के उपरान्त प्रशिक्षण प्राधिकारी द्वारा आवेदनकर्ता को एक माह की नोटिस दी जायेगी यदि उक्त अवधि में भी आवेदनकर्ता मशीन वापस लेने में असमर्थ रहता है तो मशीन संस्थान की सम्पत्ति हो जायेगी और परीक्षण प्राधिकारी के विवेकानुसार नीलामी के माध्यम से इसका निपटारा कर दिया जायेगा।
  4. यदि कोई मशीन जिसका पेटेन्ट नही है अथवा जिसके पेटेन्ट के लिये उचित आवेदन नही किया गया है, परीक्षण के लिये लायी जाती है तो इसकी परीक्षण रिपोर्ट केन्द्रीय कृषि यन्त्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान या रीजनल संस्थान द्वारा जन सामान्य के लिये प्रकाशित/ उपलब्ध नही करायी जायेगी और यह प्रकरण गोपनीय रखा जायेगा ताकि निवेशकर्ता का अधिकार अथवा व्यक्ति जो मशीन के लिये पेटेन्ट हेतु दावा कर रहा है, के लिये पक्षपातपूर्ण न हो।
  5. यदि मशीन, इसके किसी भाग के परीक्षण के दौरान राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान के अधिकारियों द्वारा कोई खोज/ और/ या विकास होता है तो सरकार अपने विवेकानुसार विषय वस्तु के संरक्षण हेतु खोज और/ अथवा विकास के लिये पृथक रूप से पेटेन्ट प्राप्त कर सकती है।
  6. यदि गोपनीय परीक्षण हेतु प्रस्तुत मशीन का परीक्षण प्रचलित व्यवसायिक परीक्षण विधि के अनुसार किया गया है और सभी बिन्दुओं पर व्यवसायिक परीक्षण विधि का पालन किया गया है तो आवेदनकर्ता के लिखित अनुरोध पर गोपनीय परीक्षण को व्यवसायिक परीक्षण में परिवर्तित किया जा सकता है।

6.2 व्यवसायिक परीक्षण हेतु अतिरिक्त नियमन

  1. यदि कोई मशीन भारत में व्यवसायिक उत्पादन में है तो बैच परीक्षण के नमूना परीक्षण प्राधिकारी अथवा मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि द्वारा क्रमबद्ध उत्पादन (सीरीज प्रोडक्शन) से बिना सोचे समझे (रैन्डम आधार पर) लिया जायेगा। तत्पश्चात् इसमें कोई परिवर्तन/ संशोधन नही किया जायेगा जो इसके प्रायोगिक निष्पादन को प्रभावित करता है।
  2. यदि परीक्षण विकास कार्य की किसी शाखा से सम्बन्धित है, जिस पर प्रशिक्षण संस्थान कार्यरत है तो पूर्ण/ आंशिक परीक्षण शुल्क निदेशक, कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के अनुमोदनोपरान्त वापस किया जा सकता है।
    1. व्यवसायिक परीक्षण प्रतिवेदन का व्यवसायिक उपयोग बिना किसी परिवर्तन अथवा इसके किसी अंश को निकाल कर किया जा सकता है। बिना परीक्षण प्राधिकारी के लिखित अनुमोदन के इसका सारांश अथवा सूक्ष्म अंश प्रकाशित किया जा सकता है।
    2. आवेदनकर्ता विज्ञापन में यह अंकित कर सकता है कि मशीन/ भाग का राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान, रहमान खेड़ा, लखनऊ/ रीजनल संस्थान (जैसी स्थिति हो) परीक्षण किया जा चुका है और विज्ञापन में परीक्षण प्रतिवेदन की संख्या भी दर्शित करेगा। सभी पम्पलेट/ विज्ञापन जो जन साधारण के लिये हैं, में परीक्षण प्राधिकारी द्वारा निर्गत निष्पादन मूल्य अंकित करना होगा।