राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान

रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लेजर लैण्ड लेवलर

लेजर लैंण्ड लेवलर द्वारा की गयी समतलीकरण एवं लेवलर द्वारा किये गये समतलीकरण में अन्तर:-

  • साधारण लेवलर से कराये गये समतलीकरण की तुलना में कम समय लगता है।
  • फसल को समान नमी मिलनें के कारण खरपतवार की समस्या का निराकरण।
  • फसल का अच्छा जमाव व बढत होनें से फसल के उतपादन में समानता।
  • बीज दर, उर्वरक एवं रसायन के दर में कमी।

लेजर लैण्ड लेवलर द्वारा कराये गये समतलीकरण से लाभ:-

  • सिचाई में 35 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।
  • सिचाई में लगनें वाले ईधन/बिजली की बचत।
  • खेत की शस्य क्रियाओं में 10: समय की बचत।
  • खेत समतल करनें में कम ईधन का उपयोग।
  • ट्रैक्टर क्षमता की आवश्यकता - 50-55 अश्वशक्ति ।

लेजर लेवलर के पार्टस:-

  • लेजर ट्रांसमीटर।
  • मशीन कन्ट्रोल रिसीवर।
  • कन्ट्रोल बॉक्स।
  • स्क्रेपर, जन्द्र, मंजा।

लेजर लेवलर की कार्य-विधि:-

  • सबसे पहले तिपाई स्टैण्ड को खेत के किसी एक किनारे पर खड़ा कर दिया जाता है।
  • तिपाई स्टैण्ड के ऊपर लेजर ट्रांसमीटर को फिट कर दिया जाता है।
  • लेजर ट्रांसमीटर को 6 बोल्ट/12 बोल्ट की बैटरी से करेन्ट दिया जाता है।
  • लेजर ट्रांसमीटर को ऑन करके एक मिनट के अन्दर तिपाई स्टैण्ड में लगी लोहे की राड के माध्यम से ट्रांसमीटर को ट्रैक्टर की छतरी से थोड़ा ऊपर उठा कर कस दिया जाता है।
  • मशीन कन्ट्रोल रिसीवर/लेजर सेन्सर लेजर बीम को लेनें के लिए लेवलर के ऊपर लगे लोहे की पाइप को ऊपर या नीचे उठाते है।
  • जब लेजर सेन्सर में हरी लाइट जलनें लगती है उसी जगह राड को कस दिया जाता है।
  • इस प्रकार कन्ट्रोल बॉक्स में हरी लाइट जलनें लगती है।
  • इसके बाद लेजर सेन्सर को ऊपर उठानें पर लेवलर नीचे की ओर आनें लगता है, लेजर सेन्सर को नीचे गिरानें पर लेवलर ऊपर आनें लगता है।
  • लेवलर को उसी तरीके से ऊपर नीचे उठा कर सेट कर सकते है।
  • सेटिंग होनें पश्चात ट्रैक्टर को स्टार्ट करके अन्दर से बाहर की ओर निकलते हुए गोलाई में चलाते है।